आंसुओं में डूबी तन्हा ये रात
: रेखा जोशी

साथी है पास फिर भी तन्हा है रात ।
कभी उड़े थे आकाश में ,सोचती ये बात
मायूस हो नीचे गिरे ,पंख कटे है आज।
वह बीते हुए लम्हे जब आते है याद ,
भीग जाती है पलकें और रोती है रात
टूटे हुए सपनो को आँखों में समेटे ,
बिस्तर पर करवटे बदलती ये रात ।
दर्दे दिल में है अब भी भरे जज्बात ,
मचलते हुए लब पे आने को है बेताब ।
पर सूनी सूनी सी कट गयी ये रात ,
सोचते हुए कब आयेगी शुभ प्रभात |